Skip to main content
inner banner

केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो (सीईआईबी) से संबंधित पृष्ठभूमि टिप्पण

दिनांक 9.7.1984 को आयोजित हुई सचिवों की समिति (सीओएस) की बैठ क में इस बात पर गौर किया गया कि अर्थव्यवस्था के काम-काज की अग्रिम चेतावनी प्रणाली और प्रत्युत्तर तंत्र को विकसित किए जाने की आवश्यकता है जो यथोचित परिवर्तन करके प्रस्तावित आर्थिक आसूचना प्रणाली की जरूरतों को पूरा कर सके। इसके अतिरिक्त, सचिवों की विशेष कार्य समिति, अग्रिम चेतावनी प्रणाली द्वारा खुलासा की गई परिस्थिति पर विचार करेगी और उन क्षेत्रों पर निर्णय लेगी जहां जांच की कार्रवाई की जा सकती है।

1985, मंत्रिमण्डल सचिवालय द्वारा आर्थिक आसूचना प्रणाली के गठन किए जाने पर एक ज्ञापन को परिचालित किया गया जिसमें ‘सचिवोंकी समिति’(सीओएस) के निष्कर्षों की समीक्षा की और वित्त मंत्रालय द्वारा आसूचना के संग्रहण के समन्वय एवं आर्थिक आसूचना के इस्तेमाल हेतु एकीकृत केंद्रीय प्राधिकरण (केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो) का सृजन करने से संबंधित प्रस्ताव का हवाला दिया सीईआईबी में उपलब्ध कागज़ातों से यह प्रतीत होता है कि केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो का गठन करने का निर्णय मंत्रिमंडल सचिवालय के ज्ञापन पर की गई चर्चा से ही लिया गया था।

केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो का गठन 1985 में किया गया था जो कि मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसरण में था। सीईआईबी के अधिदेश की रूपरेखा दिनांक 20 सिम्बर, 1985 को का.ज्ञा.फा.सं.11013/9/85 में बनायी गई। इसका गठन आसूचना को इकट्ठा करने वाली गतिविधियों, जांच; संबंधी प्रयासों और आर्थिक अपराधों से जुड़ी जांच से संबंधित विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जाने वाली प्रवर्तन कार्रवाई और आर्थिक कानूनों के प्रवर्तन को समन्वित और सुदृढ़ बनाने हेतु की गई थी। ब्यूरो की जिम्मेदारी थी कि वह केन्द्र और राज्य सरकार के दोनों स्तरों पर संबंधित विभागों और निदेशालयों के बीच संपर्क को बनाए रखे और साथ ही राजस्व विभाग के अन्य की जांच संबंधी एजेंसियों की समग्र दिशा और नियंत्रण के लिए भी जिम्मेदार था।

सीईआईबी के प्रकार्य अन्य बातों  के साथ-साथ निम्नलिखित थे: 

(क)    अनधिकृत अर्थव्यवस्था के पहलुओं के संबंध में आसूचना एवं सूचना का संग्रहण। 
(ख)    सूचना इकट्ठा करना और संबंधित प्राधिकारियों को आवधिक और विशेष रिपोर्ट भेजना। 
(ग)    आर्थिक अपराधों के अलग-अलग पहलुओं और ऐसे अपराधों के नए प्रकार के आने पर नज़र रखना। यह मौजूदा और नए प्रकार के आर्थिक अपराधों से कारगार ढंग से निपटने के लिए अपेक्षित प्रति उपायों का विकास करने हेतु उत्तरदायी होगा। 
(घ)    तस्करी का काम और अन्य आर्थिक अपराध करने वाले संगठित गिरोह और बड़े स्तर पर इस तरह के अपराध करने वाले व्यष्टियों पर डोज़ियर तैयार करना व उनका रखरखाव करना। 
(ङ)    अंतर्राष्टीय स्तर पर अन्य सीमा शुल्क ड्रग्स कानून प्रवर्तन और आर्थिक अपराधों के क्षेत्र की एजेंसियों में सहयोग व समन्वय हेतु नोडल एजेंसी के रूप में काम करना। 
(च)    स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के अध्याय 2 में उल्लिखित नामित केंद्रीय एजेंसी की योजना को केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क एवं सीमा शुल्क बोर्ड के परामर्श से तैयार करने हेतु ब्यूरो जिम्मेदार होगा। 
(छ)    महानिदेशक-सीईआईबी को राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय में अपर सचिव (आर्थिक आसूचना) के रूप में भी पदनामित किया जाएगा। वह राजस्व विभाग के आसूचना और प्रवर्तन एजेंसियों के विभिन्न शीर्षों को देखेंगे, निरीक्षण करेंगे और तकनीकी दृष्टिकोण से उनके निष्पादन पर रिपोर्ट देंगे।

मौजूदा पुनरीक्षित अध्याय के संबंध में पत्र फा.सं. 4/6/2004 दिनांक 24.10.2005 के साथ पठित फा.सं.50/107/2003/प्रशा-। दिनांक 12.12.2003 के अनुसार सीईआईबी निम्नलिखित कार्यों को करता है:-

(क)    आर्थिक आसूचना परिषद (ईआईसी) हेतु सचिवालय; 
(ख)    समन्वित कार्रवाई और आर्थिक आसूचना के आधान हेतु विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय (ईसीओआईएनटी); और 
(ग)    केंद्रीय सरकार के स्तर पर कॉफेपोसा अधिनियम, 1974 को प्रशासित करना; 
(घ)    सुरक्षा निहितार्थ वाली आसूचना के एनएससीएएस, आईबी और अनुसंधान एवं विश्लेषण स्कंध (रॉ) के बीच त्वरित प्रसार को सुनिश्चित करना; 
(ङ)    प्रादेशिक आर्थिक आसूचना परिषदों (आरईआईसी) के काम-काज में समन्वय स्थापित करना; 
(च)    बहु-अभिकरण केंद्र (एमएसी) के साथ समन्वय 
(छ)    राजस्व सचिव की अध्यक्षता के अंतर्गत कार्यकारी समूह की बैठकों का विहित अंतराल पर आयोजन करना और प्रत्येक बैठक के बाद एक रिपोर्ट ईआईसी के अध्यक्ष को सौंपना। 
(ज)    आर्थिक अपराधों से जुड़े सभी मुद्दों पर राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय हेतु ‘थिंक टैंक’के रूप में काम करना और बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का विश्लेषण का कार्य करना।