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क्षेत्रीय आर्थिक आसूचना परिषदें

नए प्रकार के निरंतर प्रकट हो रहे जटिल आर्थिक अपराधों जैसे शेल कंपनियों का उपयोग, बैंकिंग प्रक्रियाओं/दस्‍तावेजों/शेयर बाजार में हेर-फेर के कारण और आर्थिक अपराधों की नई प्रवृत्तियों की पहचान करने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को सतर्क रहना होता है तथा आसूचना साझा करने के लिए एक दूसरे के साथ लगातार संपर्क में रहना होता है। इसे ध्‍यान में रखते हुए, सरकार ने 30 क्षेत्रीय आर्थिक आसूचना परिषदों (आरईआईसी) के रूप में क्षेत्रीय आर्थिक आसूचना परिषदों (आरईआईसी) के रूप में क्षेत्रीय स्‍तर पर समन्वित आसूचना सहभाजन व अन्‍वेषण के लिए संस्‍थागत-ढांचा और तंत्र स्‍थापित किया है। 

आरईआईसी फोरम में सीबीडीटी, सीबीआईसी के अधिकारी, केंद्रीय और राज्‍य सरकारों दोनों से अन्‍य संबंधित एजेंसियों को प्रमुख शामिल हैं। आरईआईसी को क्षेत्र में व्‍यवसाय और उद्योग पर आर्थिक आसूचना एकत्रित करनी होती है तथा प्रवृत्तियों व कार्यप्रणाली की जांच करनी होती है और आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध प्रभावशाली तरीके से कार्रवाई करने के उपाय बताने होते हैं। आरईआईसी को तत्‍काल सूचना/आसूचना की जानकारी संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों को प्रसारित करनी होती है। फोरम को प्रत्‍येक दो माह में बैठक करनी होती है तथा विभिन्‍न एजेंसियों के बीच आदान-प्रदान/साझा की गई सूचना पर की गई कार्रवाई को कार्यवृत्‍त के रूप में दर्ज करना होता है और सीधे सीईआईबी को भेजना होता है। संयोजक का कार्यालय आरईआईसी का नियमित सचिवालय होगा। प्रत्‍येक आरईआईसी को बैठक के बाद नोडल अधिकारी समूह (एनजीओ) की बैठक होती है जिसमें आरईआईसी में प्रतिनिधित्‍व वाली प्रत्‍येक सदस्‍य एजेंसी से उचित स्‍तर के अधिकारी शामिल होते हैं। 

सीईआईबी कार्यप्रणाली का संयोजन करता है और आरईआईसी के कार्य‍ निष्‍पादन की निगरानी करता है। आर्थिक अपराधों की पहचान करने और अपराधियों को गिरफतार करने के लिए सर्वांगीण दृष्टिकोण अपनाना वर्तमान की आवश्‍यकता है तथा यही वह उद्देश्‍य है जिसके लिए सीईआईबी व आरईआईसी कार्य कर रहे हैं। 

आरईआईसी का संगठन- 
क्षेत्रीय आर्थिक आसूचना परिषद (आरईआईसी) में आयकर और सीमा शुल्‍क एवं सीजीएसटी विभागों के नामित अधिकारी, केंद्रीय और राज्‍य सरकारों की संबंधित एजेंसियों के प्रमुख जैसे डीआरआई, डीजीजीआई, एनसीबी, ईडी, सीबीआई, आईबी, आरओसी के स्‍थानीय प्रमुख, राज्‍य पुलिस व कर प्राधिकरण, आदि शामिल होते हैं। इसकी अध्‍यक्षता संयोजक करते हैं जो सीमा शुल्‍क, सीजीएसी या आयकर विभाग से मुख्‍य आयुक्‍त के स्‍तर के होते हैं। तथापि, यदि किसी विशेष स्‍थान पर इस स्‍तर के अधिकारी तैनात नहीं हैं तो प्रवर्तन एजेंसी/संगठन के स्‍थानीय कार्यालय की अध्‍यक्षता कर रहे अधिकारी बैठक में शामिल होंगे।